नई दिल्ली, जनवरी 19 -- हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में भोजन को केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि मां अन्नपूर्णा का स्वरूप माना गया है। रसोई घर में अन्न का सम्मान और उसकी उपलब्धता को सुख-समृद्धि, लक्ष्मी कृपा और पारिवारिक शांति से जोड़ा जाता है। इसलिए हमारे घरों में माताएं-बहनें अक्सर यही कहती हैं कि खाना हमेशा जरूरत से थोड़ा ज्यादा बनाना चाहिए। यह बात सिर्फ अतिथि सत्कार या भूख मिटाने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे गहरी आध्यात्मिक, वास्तु और सांस्कृतिक मान्यताएं हैं। जरूरत से थोड़ा ज्यादा खाना बनाना घर में बरकत लाने, नकारात्मकता दूर करने और जीवों के प्रति करुणा दिखाने का एक प्राचीन और असरदार तरीका है। आइए जानते हैं इसके पीछे का महत्व और आध्यात्मिक आधार।अन्न की अधिकता से मां अन्नपूर्णा और लक्ष्मी का वास शास्त्रों में कहा गया है कि जिस घर की ...