गढ़वा, सितम्बर 9 -- मेराल। प्रखंड अंतर्गत बहेरवा गांव के आदिम जनजाति परिवार के सदस्य जंगली हाथियों द्वारा घर तोड़े जाने के बाद तकरीबन एक साल से खानाबदोश की जिंदगी गुजार रहे हैं। घर तोड़े जाने के बाद से बेघर हुए उक्त लोगों की सुधी न तो प्रशासन ने ली न ही पंचायत स्तर पर ही कुछ पहल किया गया। गांव में 17 घरों के 71 सदस्य दर-दर भटक रहे हैं। हाथियों द्वारा घर तोड़े जाने के बाद कुछ दिनों तक बानाजंघा स्कूल में अपना ठिकाना बनाया। उसके बाद उन्हें स्कूल से हटा दिया गया। थक हारकर उक्त परिवार गेरूआसोती में वन विभाग की जमीन में सात झोपड़ी बनाकर रहने का विवश हैं। फिलहाल मात्र तीन लोग फजीहत कोरवा, बिरजू कोरवा और नारायण कोरवा वहां से बाकी लोगों का मवेशी लेकर गांव में ही रहते हैं। दिनभर मवेशी चराने के बाद हाथी के डर से शाम को स्कूल की छत में रात गुजारते हैं...
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