ओम प्रकाश सती, फरवरी 11 -- उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में अतिवृष्टि या बादल फटने से ही नहीं, बल्कि लगातार हल्की बारिश से भी धराली जैसी आपदा आ सकती है। पहाड़ों पर जगह-जगह जमा मलबे के ढेर मामूली बारिश में ही आपदा के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं। दून विश्वविद्यालय ने देश के छह नामी संस्थानों के वैज्ञानिकों के साथ किए अध्ययन में ये चिंता जताई है वैज्ञानिकों के मुताबिक, पहाड़ों पर यदि 15 से 30 दिन तक रोज छह से सात मिलीमीटर बारिश होती है तो मलबा जानलेवा हो सकता है। मलबे के ढेर पानी सोखने के बाद दस किलोमीटर प्रति सेकेंड की गति से खिसक सकते हैं और ये स्थिति निचले क्षेत्रों में रह रही आबादी के लिए कहर साबित हो सकती है। यह भी पढ़ें- अब बिना रोके वसूली, उत्तराखंड में इन 11 जगहों पर बाहरी वाहनों से ग्रीन सेस शुरू यह भी पढ़ें- उत्तराखंड में एकल महिला स्व...
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