मिर्जापुर, नवम्बर 26 -- जिगना। क्षेत्र के पहाड़ी गाँव कामापुर कला में डेढ़ सौ आबादी वाले सेतुहार जठ्ठहवां मजरे के कोल-आदिवासी बस्ती के लोग प्यास बुझाने के लिए नदी-नालों के पानी पर आश्रित हो गए हैं। परिषदीय स्कूल का समरसिबल पंप चलने पर बस्ती की महिलाएं बाल्टी व ड्रम लेकर दौड़ पड़ती हैं। किंतु स्कूल बंद होने पर उन्हें पहाड़ी नदी और नालों का पानी भरने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। पानी इकट्ठा करने के लिए बस्ती से पांच सौ मीटर दूर चक्रमण करना पड़ता है। रीना,सुघरी,मंतोरा,पानकली,हीरावती,राजकली आदि महिलाओं ने बताया कि तीन साल पहले लगा नल मुंह चिढ़ा रहा है। नलों की टोटियों से पानी की बूंदे भी नहीं टपकती। हैंडपंप शो-पीस बने हुए हैं। सेतुहार स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक अरुण पांडेय ने बताया कि परिसर स्थित समरसिबल पंप से पानी भरने के लि...
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