बांदा, जनवरी 21 -- बांदा, संवाददाता। गंभीर मरीजों की उखड़ती सांसे बचाने के लिए अब सरकारी एंबुलेंस मददगार नहीं साबित हो पा रही हैं। जनपद में एक तरफ सरकारी एंबुलेंस की भारी कमी है तो दूसरी तरफ राह में जिला अस्पताल से लेकर मरीजों के घर तक जाम का झाम है। एंबुलेंस से मरीज को लेने और मरीज को लेकर जिला अस्पताल पहुंचने में तमाम कठिनाइयां हैं। जाम के चलते वह दस किलोमीटर की दूरी तय करने में आधा घंटा से ज्यादा समय लगाती हैं। ऐसे में कई मामले ऐसे सामने आते हैं कि एंबुलेंस समय से न पहुंचने के कारण मरीजों की सांसें उखड़ जाती हैं। जिला अस्पताल से शहर के बाहर तक निकलने में एंबुलेंस को आधा घंटे का समय लग जाता है। अतर्रा व नरैनी रोड में यदि जाना पड़ता है तो रोडवेज बस स्टैंड, बाबूलाल चौराहे का जाम एंबुलेंस चालकों पर भारी पड़ता है। सबसे बड़ी चीज सिविक सेंस क...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.