नई दिल्ली। पीटीआई, अप्रैल 4 -- दिल्ली की तीस हजारी अदालत ने रेप का झूठा केस दर्ज कराने और झूठी गवाही देने वाली महिला के खिलाफ कार्यवाही करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा, "झूठी गवाही अक्सर निर्भीक और खुले तौर पर दी जाती है। सच्चाई को शर्मिंदा होना पड़ता है।" आरोपी को बरी करने वाली अदालत ने कहा कि यह हनी ट्रैप का मामला है, जिसमें कथित पीड़िता ने व्यक्ति को पैसे ऐंठने के लिए पूर्व-नियोजित तरीके से फंसाया। एडिशनल सेशंस जज अनुज अग्रवाल आरोपी के खिलाफ मामले की सुनवाई कर रहे थे, जिस पर रेप, आपराधिक धमकी, महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला करने, महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने और यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गए थे। 1 अप्रैल को जारी अपने आदेश में जज ने पेश किए गए सबूतों पर गौर किया और कहा, "इस मामले में अभियोक्ता की गवाही न केवल विरोधाभास पूर...