नई दिल्ली, जनवरी 22 -- भारत का हथकरघा क्षेत्र देश के सबसे प्राचीन और विकेन्द्रित रचनात्मक उद्योगों में शामिल है, जो लाखों कारीगरों और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को आजीविका प्रदान करता है। हालांकि, अपने विशाल आकार और सांस्कृतिक महत्व के बावजूद, हथकरघा परंपराओं का एक बड़ा हिस्सा अब तक व्यवस्थित रूप से प्रलेखित नहीं हो सका है। इसी कमी को दूर करने के उद्देश्य से लेखिका रिदम वाघोलिकर और कलाकार प्राची ढाबेल देब ने भारत की हथकरघा परंपराओं के राज्य-वार दस्तावेजीकरण की एक संरचित और सहयोगात्मक पहल शुरू की है। यह पहल हथकरघा को केवल वस्त्र या उत्पाद के रूप में नहीं, बल्कि एक संपूर्ण सामाजिक-सांस्कृतिक प्रणाली के रूप में समझने पर केंद्रित है। रिदम वाघोलिकर अपने शोध-आधारित लेखन के माध्यम से यह पड़ताल करती हैं कि किस प्रकार विभिन्न क्षेत्रों की हथकरघा परंपर...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.