वाराणसी, जनवरी 10 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। बच्चों को उन्मुक्त काम करने दो। बच्चों को रंगमंच पर लाने के लिए रंगमंच को भी उन्मुक्त करना होगा। बच्चे को रंगमंच पर स्वतंत्र छोड़ देना सर्वोत्तम है। वो संगीत के नाम पर बर्तन बजाएं, बजाने दो। उल्टा-सीधा बजाएं, बजाने दो। सब उनपर छोड़ दो। बस उनको इतना बता दो कि उनके पास समय कितना है। बहुत होगा वह तय समय से थोड़ पहले या थोड़ी देर बाद खत्म करे लेकिन उन्मुक्त रहते हुए बच्चा जो कर देगा वह निर्देशन में बांध कर उससे नहीं कराया जा सकता। यह बातें नाट्य व्यक्तित्व डॉ.राजेंद्र उपाध्याय ने अपने अंतिम साक्षात्कार में कही थीं। निधन से कुछ दिनों पूर्व अपने शिष्य राजेश्वर त्रिपाठी को दिए गए साक्षात्कार में उन्होंने बाल रंगमंच पर खुलकर बातचीत की थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि बच्चे को स्वतंत्र छोड़ दो। वो...