नई दिल्ली, जून 14 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। आगरा की गलियों से लंदन के कला संसार तक की सोनाक्षी की यात्रा महज भौगोलिक नहीं, बल्कि स्मृतियों, परंपराओं और स्त्री अस्मिता की अनकही कहानियों को समेटने वाली एक खोज है। इन दिनों सोनाक्षी के शिल्प की जात शीर्षक से प्रदर्शनी राजधानी के ब्रिटिश काउंसिल में प्रदर्शित की गई है। इसमें घर की दादी, मां, बहू की अनकही आवाजें धातुओं में ढले अनुभव, रंगों में छिपी इच्छाएं दिखाई देती हैं। यह कोई साधारण कला नहीं, एक स्मृति-स्तंभ है। एक तरह की 'मेटेरियल मेमोरी', जहां हर धातु, हर नगीना, हर रंग अपनी दबी हुई कहानी कहता है। सोनाक्षी बताती हैं कि जात मेरे लिए अपनी यादों को सहेजने का जरिया था, लेकिन यह धीरे-धीरे एक ऐसा माध्यम बन गया जिससे मैं उन महिलाओं की कहानियों को सामने ला सकूं, जिन्हें कभी ठीक से सुना ही नही...
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