नई दिल्ली, फरवरी 6 -- कुछ साल पहले तक कहानी सीधी थी। ज्यादातर छात्र क्लास 11 या 12 में पहुंचकर कॉलेज एडमिशन के बारे में गंभीरता से सोचना शुरू करते थे। अच्छे नंबर, ठीक-ठाक एक्स्ट्रा करिकुलर और बस। लेकिन आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। खासकर ग्लोबल और टॉप यूनिवर्सिटीज अब सिर्फ अंकों से खुश नहीं होतीं। वे यह समझना चाहती हैं कि छात्र कौन है, कैसे सोचता है, किस चीज को लेकर जुनूनी है और क्या उसकी रुचियां समय के साथ सच में विकसित हुई हैं। यही वजह है कि अब क्लास 9 से प्रोफाइल बिल्डिंग कोई लग्जरी नहीं, बल्कि एक बड़ा कॉम्पिटिटिव एडवांटेज बन चुकी है।अभी से ही तैयारी क्यों जरूरी आज एडमिशन ऑफिसर्स को लंबी-चौड़ी एक्टिविटी लिस्ट नहीं चाहिए। उन्हें चाहिए समय के साथ बना हुआ जुड़ाव। जब कोई छात्र क्लास 9 से शुरुआत करता है, तो उसे पढ़ाई, लीडरशिप, रिसर्च, पब्...