गुड़गांव, दिसम्बर 15 -- गुरुग्राम। हर सुबह गुरुग्राम की गलियों में स्कूल जाती नन्ही पीठों पर किताबों से भरे भारी बैग लदे होते हैं। कई बच्चे बस स्टॉप तक पहुंचते-पहुंचते थक जाते हैं, तो कई के कंधों और गर्दन में दर्द अब रोज की शिकायत बन चुका है। बच्चों की यह चुप तकलीफ अब संसद तक पहुंची है। स्कूल बैग के बढ़ते वजन को लेकर संसद में उठे सवाल के बाद उम्मीद जगी है कि गुरुग्राम के बच्चों को भी जल्द ही इस रोजाना के बोझ से राहत मिल सकेगी और स्कूलों में हल्के बैग का सपना हकीकत बन पाएगा। संसद में पूछे गए एक सवाल के जवाब में शिक्षा मंत्रालय ने साफ किया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्कूल बैग का वजन सीमित रखने के स्पष्ट निर्देश हैं, लेकिन कई जगह इनका पालन नहीं हो रहा। इसके बाद अब संकेत मिले हैं कि स्कूलों, खासकर प्राइवेट स्कूलों पर निगरानी बढ़ाई जा ...