मुजफ्फरपुर, जुलाई 9 -- मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। स्कूली बच्चों पर 12 अरब रुपये से अधिक खर्च कर दिये गये, लेकिन उसका हिसाब विभाग को अबतक नहीं मिल पाया है। साल 2011-12 से 2018-19 की योजनाओं की राशि का यह मामला है। एसीडीसी एवं उपयोगिता कोषांग के अवर सचिव सह प्रभारी पदाधिकारी सियाराम प्रसाद केशरी ने सूबे के 38 जिलों के डीईओ और डीपीओ से इसपर जवाब मांगा है। मुजफ्फरपुर में 16 करोड़ से अधिक राशि का हिसाब ढूंढा जा रहा है। सूबे में छात्रवृति व पोशाक की सबसे अधिक राशि का हिसाब नदारद है। पोशाक में 73 और छात्रवृति में 98 करोड़ से अधिक खर्च की उपयोगिता नहीं मिली है। इसके अलावा किशोरी स्वास्थ्य, साइकिल की योजना के खर्च का भी हिसाब गायब है। सामान्य छात्रवृति मद में 98 करोड़ से अधिक का देना है हिसाब सूबे में सामान्य छात्रवृति मद में 98 करोड़ से अधिक राश...
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