छपरा, दिसम्बर 5 -- सोनपुर, संवाद सूत्र । एशिया प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र मेला पशुओं की खरीद बिक्री के लिए ज्यादा विख्यात था। इसका वजूद अब सिमट रहा है। तत्कालीन राज्यपाल राज्यपाल देवानंद कुंअर द्वारा घोषित मवेशी फार्म भी अब तक नहीं खुला। पहले मेले में गायों की संख्या तीन- चार हजार से अधिक हुआ करती थी। अब तो गायों की संख्या ऊंगलियों पर गिनी जा सकती है। हाल के वर्षों में गाय, बैल और अन्य पशुओं की संख्या में काफी कमी आई है। गाय बाजार और बैल बाजार तो करीब- करीब सूना ही रहता है। हाथी की खरीद- बिक्री पर सरकार ने रोक लगा दी है जबकि घोड़ों की बिक्री भी अब अपेक्षाकृत कम हो रही है। पहले पंजाब और हरियाणा की उन्नत नस्ल की गायों के लिए यह मेला जाना जाता था। मेले की सरकारी अवधि समाप्त होने के एक- डेढ़ माह बाद तक पंजाबी व्यापारी यहां ठहर कर गायों का कारोबार क...
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