नई दिल्ली, अगस्त 11 -- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भारतीय सेना की कानूनी शाखा जज एडवोकेट जनरल(जेएजी) में पुरुष अधिकारियों की भर्ती के लिए बनी आरक्षण नीति रद्द कर दी। नीति के तहत जेएजी शाखा में पुरुषों के लिए अधिक सीटें आरक्षित करते हुए, महिलाओं की नियुक्ति सीमित कर दी गई थी। शीर्ष अदालत ने फैसले में कहा कि लैंगिक समानता का सही अर्थ यह है कि सभी मेधावी उम्मीदवारों का, चाहे वे किसी भी लिंग के हों, चयन होना चाहिए। जस्टिस दीपांकर दत्ता और मनमोहन की पीठ ने भारत सरकार और सेना को निर्देश दिया कि वे सेना के जेएजी शाखा में इस प्रकार भर्ती करें कि किसी भी लिंग के लिए सीटों का विभाजन न हो। पीठ ने कहा कि यदि सभी महिला उम्मीदवार योग्य हैं, तो उन सभी का चयन किया जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि जेएजी में एक समान योग्यता सूची प्रकाशित की जाएगी, जिसमें सभी उम्मी...
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