मोतिहारी, अक्टूबर 27 -- मोतिहारी । स्कंद पुराण के अनुसार सूर्यषष्ठी व्रत मुख्य रुप से भगवान सूर्य का व्रत है।इस व्रत में अस्ताचल और उदित सूर्य को अर्घ्य देकर पूजन किया जाता है । इस दिन निराहार रहकर और अपनी वाणी पर संयम रखते हुए किसी नदी या तालाब के किनारे जाकर भगवान सूर्य के साथ माता षष्ठी के पूजन का विधान है । वेद विद्यालय के प्रधानाचार्य सुशील कुमार पांडेय बताते हैं कि छठ पूजा में पूजन सामग्रियों के साथ ही ऋतु फलों का प्रयोग अर्घ्य देने में किया जाता है । छठे व्रती बड़े ही नियम व संयम के साथ किया जाता है । इस व्रत को करने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। महाभारत के समय में हुई शुरुआत : पौराणिक कथाओं के अनुसार, छठ पूजा की शुरुआत महाभारत के समय में हुई थी। सबसे पहले सूर्य पुत्र कर्ण ने सूर्यदेव की पूजा शुरू की। वह प्रतिदिन घंट...
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