समस्तीपुर, नवम्बर 26 -- जिले में नृत्य और संगीत कला की समृद्ध संस्कृति रही है। स्थानीय कलाकारों ने देश के बड़े मंचों पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इसके बावजूद कलाकार स्थानीय मंचों पर अपनी अनदेखी से इतना ही नहीं नृत्य से जुड़े कलाकारों को सरकारी आयोजनों में भी उचित जगह नहीं मिलता है। जिले के स्थापना दिवस में बाहरी कलाकारों को बुलाया जाता है। इसमें दिल्ली, कोलकाता, मुंबई के कलाकार प्रस्तुति देते हैं, मगर जिले के नृत्य कलाकार को मौका नहीं दिया जाता है। अगर मिलता भी है तो बस मंच तक ही उनको स्थान दिया जाता है। उनको अपने कला का प्रदर्शन करने का भी मौका नहीं दिया जाता है। रीना कुमारी बताती हैं कि शहर में नृत्य कलाकारों की कई टीम सक्रिय है। यहां के नृत्य कलाकार अपनी नृत्य कला के प्रदर्शन के लिए देश के कोने-कोने में पहुंचते हैं पर अपने ही जिले...
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