वाराणसी, नवम्बर 24 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। सुबह-ए-बनारस आनंद कानन सनातन परंपरा की निरंतरता बनाए रखने का अद्भुत उपक्रम है। यहां आने से पहले मेरे मन में तरह-तरह की बातें चल रही थीं। भोर का समय है, ठंड का मौसम है, कौन आएगा, कितने लोग आएंगे। ऐसी कई बातें मन में चल रही थीं लेकिन अस्सी घाट पहुंचने के बाद जो देखा वह अकल्पनीय था। यह कहना है बीएचयू के कुलपति प्रो.अजित कुमार चतुर्वेदी का। वह सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में अस्सी घाट पर सुबह-ए-बनारस आनंद कानन की 11वीं वर्षगांठ पर आयोजित वैदिक यज्ञ के बाद उपस्थित जनों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अध्यात्म के प्रति समर्पण का भाव रखने वालों की भीड़ देखकर चमत्कृत हूं। सांस्कृतिक उत्थान के निमित्त जो लोग अपना योगदान कर रहे हैं निश्चित रूप से उन सभी पर बाबा विश्वनाथ की असीम कृपा है। इससे पूर्व ...