सुपौल, दिसम्बर 23 -- किशनपुर, एक संवाददाता। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा आयोजित श्री रामचरितमानस एवं गीता ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन मंगलवार को आशुतोषजी महाराज के शिष्य स्वामी सुकर्मानन्द जी ने जीवन में संस्कार एवं सत्संग के सिद्धांत पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल भौतिक उपलब्धियां नहीं, बल्कि उत्तम संस्कारों का निर्माण एवं सत्संग के माध्यम से आत्मिक उन्नति करना है। उन्होंने कहा कि संस्कार व्यक्ति के आचरण, विचार और व्यवहार को दिशा देते हैं, जबकि सत्संग जीवन में सही विवेक जाग्रत कर सत्य और धर्म के मार्ग पर अग्रसर करता है। स्वामी सुकर्मानन्द जी ने श्रीरामचरितमानस एवं श्रीमद्भगवद्गीता के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि जब जीवन में सद्गुण, सेवा, करुणा और गुरु-कृपा का समावेश होता है, तब मानव जीवन सार...