सुपौल, फरवरी 17 -- मरौना, एक संवाददाता। भूल और गलती करना मानव का स्वाभाविक लक्षण है, लेकिन समय रहते इसमें सुधार व प्रायश्चित जरूरी है। तभी मनुष्य की आत्मा को शांति मिलेगी। अगर ऐसा नहीं हुआ तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है। उक्त बातें मरौना उत्तर पंचायत के कबरीबांध वार्ड आठ में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कवि गंगा राम शरण महाराज ने कहीं। इससे पूर्व यहां नव निर्मित मंदिर में शिवलिंग की स्थापना और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। कथा वाचन के क्रम में कथा व्यास ने पांडवों के जीवन में होने वाली श्रीकृष्ण की कृपा को बड़े ही सुंदर प्रसंग के माध्यम से दर्शाया। उन्होंने शुकदेव-परीक्षित संवाद का वर्णन करते हुए कहा कि एक बार राजा परीक्षित शिकार के लिए वन में गए। वन्य पशुओं के पीछे दौड़ने के कारण वे प्यास स...