सुपौल, जनवरी 7 -- सुपौल, हिन्दुस्तान संवाददाता। कभी सुपौल जिले गांवों के आसपास से होकर बहने वाली छोटी-छोटी नदियां और नहरें पशुओं के जीवन का अहम आधार थीं। इन्हीं नदियों में पशु नहाते थे और पीने के लिए भरपूर पानी मिलता था। लेकिन समय के साथ नदियों और नहरों का वजूद लगभग खत्म होता जा रहा है। इसका सीधा असर पशुपालकों पर पड़ रहा है, जो अब पशुओं के लिए पानी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। पशुपालक बिन्देश्वरी साह, रामफल मंडल, रामवत यादव, रमेश गुरमैता, चन्देश्वरी यादव, परमेश्वरी मंडल आदि ने बताया कि ग्रामीण इलाकों में कई छोटी नदियां और नहरें या तो सूख चुकी हैं या अतिक्रमण और गाद भरने के कारण उनका प्रवाह रुक गया है। नहरों में भी साल के अधिकांश समय पानी नहीं रहता। ऐसे में पशुपालकों को मजबूरी में चापाकल, नल-जल योजना या दूसरों के घरों में लगे मोटर पंप से...
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