सुपौल, जनवरी 6 -- सुपौल, हिन्दुस्तान संवाददाता। उत्तर बिहार का सुपौल जिला कभी जल संसाधनों के मामले में समृद्ध माना जाता था। सुरसर नदी, बघैली माइनर, बघैली नहर, जेबीसी नहर, छुरछुरिया धार, पूर्वी कोसी मुख्य नहर, तिलावे धार और घाघर धार जैसी छोटी-बड़ी नदियों व नहरों से खरीफ और रबी दोनों फसलों की सिंचाई होती थी। लेकिन अब हालात तेजी से बदल गए हैं। बारिश थमते ही नदियों में पानी खत्म हो जाता है और कई बार मानसून में भी खेत सूखे रह जाते हैं। किसानों का कहना है कि पिपरा, सदर प्रखंड, त्रिवेणीगंज, राघोपुर, छातापुर और किशनपुर जैसे इलाकों में कभी पानी की कमी नहीं होती थी। पहले जहां करीब 4.5 लाख हेक्टेयर खेतों की सिंचाई होती थी, वहीं अब नदी जल से सिंचाई का दायरा सिमटकर मात्र 70 से 80 हजार हेक्टेयर रह गया है। मजबूरी में किसान निजी नलकूपों पर निर्भर हो गए है...