सुपौल, नवम्बर 19 -- सरायगढ़, निज संवाददाता। मनुष्य को अहंकारी नहीं होना चाहिए अहंकारी व्यक्ति का सर्वदा विनाश ही होता है। मनुष्य को झुठ, चोरी,नशा व्यभिचार, हिंसा आदि पांच पाप कर्मों से बचना चाहिए। अहंकारी व्यक्ति समाज में आगे नहीं बढ़ता है। सत्संग प्रवचन सुनने से ही मनुष्य जीवन सफल हो जाता है। प्रत्येक दिन कुछ समय निकालकर इश्वर का भक्ति करना चाहिए। उक्त बातें दो दिवसीय सदगुरु सत्संग प्रवचन के समापन के दिन सरायगढ़ रेलवे स्टेशन के बगल में मां दुर्गा मंदिर परिसर में बुधवार को प्रवचन के दौरान पूज्य पाद महर्षि चतुरानंद जी महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि मनुष्य के दुःखों का कारण दुसरे की आलोचना, द्वेष, और भागदौड़ भरी जिंदगी है। इससे बचने के लिए आपसी सहयोग, प्रेम, कर्म और विश्वास करना चाहिए। संसार में प्रत्येक जीव जंतु किसी न किसी रूप में शांति की...