कानपुर, जनवरी 13 -- रसूलाबाद/रूरा। सुदामा दीनहीन ब्राह्मण नहीं निष्काम कर्मयोगी थे। उन्होंने अपनी श्रद्धा व भक्ति से भगवान का सानिध्य हासिल करने के साथ परमगति प्राप्त की। मंगलवार को रसूलाबाद में श्रीमद् भागवत कथा सुनाते हुए आचार्य ने यह उद्गार व्यक्त किए, जबकि बनीपारा जिनई में भगवान श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं का वर्णन सुनकर श्रोता भाव-विभोर हुए। रसूलाबाद कस्बे के ऋषि आश्रम में चल रही भागवत कथा के अंतिम दिन नैमिषारण्य से आए आचार्य गोविन्द मिश्र ने भागवत कथा में सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहाकि भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त होने के बाद भी बाल्यावस्था में गुरूमाता के दिए चने मित्र श्रीकृष्ण से छिपाकर खाने में सुदामा को दरिद्रता का दंश मिला। उन्होंने कथा के माध्यम से लोगों से गुरू व मित्र से छल नहीं करने व भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रत...
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