रांची, अगस्त 9 -- रांची, वरीय संवाददाता। विश्व आदिवासी दिवस पर केंद्रीय विश्वविद्यालय, झारखंड (सीयूजे) के मानव विज्ञान और जनजातीय अध्ययन विभाग (डीएटीएस) ने 'आदिवासी लोग और 'एआई: अधिकारों की रक्षा, भविष्य को आकार देना विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया। स्कॉटलैंड के टोलहीशेल खालिंग मुख्य वक्ता थे। टोलहीशेल खालिंग का सत्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वदेशी समुदायों के प्रतिच्छेदन पर केंद्रित था। उनका कहना था कि उभरती प्रौद्योगिकियां अवसर प्रदान कर सकती हैं और स्वदेशी अधिकारों, संस्कृतियों और भविष्य के संरक्षण के लिए चुनौतियां भी खड़ी कर सकती हैं। भले ही भारत सरकार आदिवासी संस्कृति के मूर्त हिस्से पर ध्यान केंद्रित करते हुए धरती आबा जनभागीदारी अभियान जैसी विभिन्न योजनाएं लेकर आई है, लेकिन कहीं न कहीं संस्कृति का एक बहुत ही महत्वपूर्ण, अमूर्त ...