रांची, मार्च 20 -- रांची, वरीय संवाददाता। केंद्रीय विश्वविद्यालय, झारखंड के अंतरराष्ट्रीय संबंध विभाग की ओर से आयोजित दो-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन गुरुवार को हुआ। इसका विषय भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित संवहनीय संयोजकता की परिकल्पना : क्षेत्रीय संगठन एवं विकास वाहक स्वरूप दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया की भूमिका रखा गया था। अंतिम दिन लगभग 40 और कुल 100 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। अंतिम दिन सुबह के सत्र में जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के महेश देबता ने बताया कि बुद्धिस्ट परंपरा के साथ हिन्दू एवं सनातनी संस्कृति व कला का विस्तार चीन के जिनजियांग से लेकर सेंट्रल एशिया के क्षेत्रों में हुआ। इस विषय पर गहन शोध की आवश्यकता है। कल्याणी विश्वविद्यालय के प्रतीप चट्टोपाध्याय ने चर्चा की कि भारतीय ज्ञान परंपरा को पड़ोसी देशों पर थोप...
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