बोकारो, जनवरी 16 -- इस्पात मजदूर मोर्चा सीटू की टीम जन संपर्क अभियान को तेज करते हुए शुक्रवार को ब्लास्ट फर्नेस विभाग पहुंची। मजदूरों को संबोधित करते हुए यूनियन के महामंत्री आर के गोरांई ने कहा केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा 21 नवंबर को अधिसूचना जारी कर श्रम संहिताओं को मजदूर समर्थक और आधुनिकीकरण के रूप में चित्रित करने का प्रयास किया है। जबकि वास्तव में वे आजादी के बाद से मजदूरों के कड़े संघर्षों से हासिल अधिकारों और हकों का सबसे व्यापक और आक्रामक हनन हैं। जिसका मकसद कारपोरेट के शोषण, ठेकेदारी और अनियंत्रित नियुक्ति और बर्खास्तगी को सुविधाजनक बनाना है। उन्होंने कहा देश का सर्वोच्च त्रिपक्षीय आधिकारिक मंच, भारतीय श्रम सम्मेलन ट्रेड यूनियनों के लगातार आग्रह के बावजूद पिछले दस वर्षों से नहीं बुलाया गया है। सीटू, एटक, इंटक, एचएमएस, सेवा, एआईयू...