नई दिल्ली, जनवरी 29 -- सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से कहा कि वह सड़कों के निर्माण में शामिल ठेकेदार को कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (सीएसआर) के तहत गौशाला बनाने को कहे, ताकि हाइवे पर आने वाले लावारिस पशुओं की देखभाल की जा सके। शीर्ष अदालत ने एनएचएआई से एक ऐप भी डेवलप करने को कहा है, जहां लोग राष्ट्रीय राजमार्ग पर लावारिस जानवरों के बारे में शिकायत कर सकें। जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन.वी. अंजारिया की पीठ ने लावारिस कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए दिशा-निर्देश जारी करने के मुद्दे पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए यह निर्देश दिया। पीठ ने एनएचएआई से कहा कि आप ठेकेदारों से हर 50 किमी के बाद एक गौशाला बनाने को कह सकते हैं, जहां इन लावारिस जानवरों की सीएसआर के तहत देखभाल की जा सके। एनएचएआई...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.