अहमदाबाद, जनवरी 23 -- गुजरात हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ किया है कि किसी भी मंदिर का पुजारी ज़मीन का मालिक नहीं होता, बल्कि वह केवल देवता का सेवक होता है। अदालत ने एक ऐसे पुजारी की अपील खारिज कर दी, जो सार्वजनिक रास्ते पर बने गणेश मंदिर की ज़मीन पर अपना मालिकाना हक जताना चाहता था। जस्टिस जे.सी. दोशी की पीठ ने ये फैसला सुनाते हुए कहा कि सिर्फ वर्षों तक पूजा-पाठ करने से किसी पुजारी को मंदिर की ज़मीन पर अधिकार नहीं मिल जाता और न ही वह मंदिर को तोड़े जाने से रोक सकता है। रमेशभाई उमाकांत शर्मा बनाम आशाबेन कमलेशकुमार मोदी और अन्य के मामले में जस्टिस जेसी दोशी ने कहा कि पुजारी को मंदिर को गिराने से रोकने या ज़मीन पर मालिकाना हक का दावा करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। अपील खारिज करते हुए, कोर्ट ने पुजारी की सीमित भूमिका को साफ तौर पर समझा...