नई दिल्ली, नवम्बर 17 -- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि वह दिल्ली-एनसीआर में खराब वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए साल भर निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध जैसे कठोर कदम उठाने के पक्ष में नहीं है। शीर्ष अदालत ने वायु प्रदूषण के दीर्घकालिक समाधान की वकालत की। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन और एन. वी. अंजारिया की पीठ ने इसके साथ ही, ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के तहत निर्माण सहित सभी प्रतिबंधित गतिविधियों पर साल भर प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि राजधानी में आबादी का एक बड़ा हिस्सा अपनी आजीविका के लिए विभिन्न गतिविधियों पर निर्भर है। अदालत ने कहा कि निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने जैसे कठोर आदेश के दूरगामी परिणाम होंगे और लाखों लोगों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी। केंद्र या राज्य हम...