मधुबनी, अक्टूबर 29 -- सरायरंजन। भाई बहनों का त्योहार शाम चकेवा के अवसर पर सामा चकेवा की मूर्ति से सरायरंजन बाजार सज गया है। भाई बहन का यह त्योहार छठ पर्व के समापन दिन से शुरू होकर कार्तिक माह के पूर्णिमा तक चलता है। प्रत्येक दिन शाम को डाला दौरी में इस प्रतिमा को रखकर उसे दरवाजे पर रखकर मुहल्ले की माता बहनें बिहार की लोक गीत सोहर गाती है। लड़के तथा लड़कियां अलग अलग टोली बनाकर जट्ट जट्टीन जो बिहार का लोकनृत्य है खेलती है। प्रत्येक दिन लोकनृत्य करने के बाद डाला फेरा जाता है। कार्तिक के पूर्णिमा के दिन सामा चकेबा की विदाई की जाती है। उसके लिए मिट्टी के तरह तरह के पकवान बनाए जाते हैं फिर डोली बनाई जाती है। बहनें इसे नदी, पोखर या तालाब के किनारे तक लोग गीत गाते हुए ले जाती हैं फिर किनारे पर रखकर खोइंछा भराई रस्म होती है। इसके बाद पटशन के डांट और...