गया, सितम्बर 10 -- पूर्व मुख्यमंत्री भोला पासवान शास्त्री सामाजिक न्याय और राजनीतिक भागीदारी की जो गारंटी दी, वह अभी भी अधूरी है। बिहार सामाजिक न्याय आंदोलनों की भूमि रहा है। लेकिन आज भी अनुसूचित जातियां राजनीतिक रूप से विभाजित और कमजोर है। उक्त बातें बुधवार को पटना स्थित बिहार विधान परिषद के सभागार में पूर्व मुख्यमंत्री भोला पासवान शास्त्री की स्मृति पर आयोजित व्याख्यान में मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० एसपी शाही ने कही। उन्होंने वर्ष 1950 से अब तक अनुसूचित जातियों की सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक यात्रा का विश्लेषण किया। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को सशक्तिकरण का मुख्य आधार बताते हुए कहा कि डिजिटल साक्षरता और लिंग समानता पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री व विधान परिषद सदस्य ...
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