उरई, फरवरी 22 -- जालौन। चुर्खी रोड स्थित बालजी गुर्जर के आवास पर साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा के समापन पर सुदामा चरित का वर्णन किया गया। व्यास पंडित संतोष कुमार ने कहा सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता सांसारिक स्वार्थ से परे थी। सुदामा निर्धन होने के बावजूद मित्र श्रीकृष्ण से कभी कुछ मांगने नहीं गए, बल्कि मन में केवल प्रेम और श्रद्धा थी। बताया जब सुदामा पत्नी के आग्रह पर द्वारका पहुंचे तो श्रीकृष्ण ने राजसी सम्मान दिया और मित्र के चरण धोकर आदर्श मित्रता का उदाहरण प्रस्तुत किया। भगवान श्रीकृष्ण ने सुदामा से कुछ मांगे बिना ही उनकी गरीबी को दूर कर दिया। कथा के दौरान भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय बना रहा। सुदामा चरित के प्रसंग सुनकर श्रोताओं की आंखें नम हो गईं और पूरे पंडाल में जय श्रीकृष्ण के जयकारे गूंज उठे। इस मौके पर पारीक्षित सुनीता, शिवराम ...