मुजफ्फर नगर, नवम्बर 22 -- तीर्थ नगरी शुकतीर्थ स्थित सिद्धपीठ मां पूर्णागिरी मंदिर में साधु-संतों को संबोधित करते हुए श्री हनुमान पंचवटी पंचोवन के पीठाधीश्वर स्वामी ऋषिकुमार दास देवाचार्य महाराज ने कहा कि साधु-संतों की भूमिका सामाजिक कुरीतियों को दूर करने में निर्णायक हो सकती है, यदि वे सक्रिय रूप से भाग लें, तो भारत एक समान और न्यायपूर्ण समाज की ओर अग्रसर हो सकता है। देवाचार्य महाराज ने कहा कि समाज को अब संतों से उम्मीद है कि वे सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित न रहें, बल्कि सामाजिक न्याय की मशाल जलाएं। साधु-संतों की पारंपरिक छवि आध्यात्मिकता और त्याग से जुड़ी हुई है, लेकिन आधुनिक समय में वे समाज सुधार के प्रमुख वाहक बन सकते हैं। महिलाओं के खिलाफ हिंसा को रोकने के लिए संत लोग पुरुषों को समानता का पाठ पढ़ा सकते हैं। अंधविश्वास, जैसे भूत-प्रेत या ज्...