पटना, दिसम्बर 4 -- पूर्व मंत्री शिवानंद तिवारी ने कहा है कि चुनावी माहौल की खबरें निराशा पैदा करती हैं। गरीब आदमी या साधारण कार्यकर्ता के लिए चुनाव में खड़ा होना अब संभव नहीं है। गुरुवार को जारी बयान में उन्होंने कहा कि कोई दल हो, ऐसे उम्मीदवार की तलाश करते हैं जो टिकट लेने से लेकर चुनावी खर्चे तक वहन कर सके। खर्च इतना बढ़ गया है कि इसकी कल्पना नहीं कर सकते। बड़े नेताओं के क्षेत्र में खर्च की कल्पना नहीं की जा सकती। पहले से ही ऐसे नेताओं के इलाके में बेशुमार खर्च होते रहे हैं। वर्ष 1977 को याद करते हुए शिवानंद ने कहा कि टिकट मिलने के बाद हमने अपने पिता (रामानंद तिवारी) के कहने पर अपना नामांकन वापस ले लिया था। परिवारवाद का आरोप लगाने वाले यह जान लें कि उस समय कैसा नैतिक मूल्य था। कर्पूरी ठाकुर के दबाव पड़ने पर साथियों से पूछा कि कैसे चुनाव...