नई दिल्ली, सितम्बर 10 -- दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले के अनुसार, यदि स्त्री और पुरुष विवाह की प्रक्रिया से गुजरे हैं तो सात फेरों का सबूत ना होने से शादी को रद्द नहीं माना जा सकता है। अदालत ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि केवल इसलिए वैध विवाह की धारणा कम नहीं होती, क्योंकि पक्षों के बीच सप्तपदी (सात फेरे) समारोह होने का कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है।विवाह की प्रक्रिया से गुजरना महत्वपूर्ण जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने कहा कि यदि इस बात के भी प्रमाण मिलते हैं कि पक्षकार विवाह की प्रक्रिया से गुजरा है, तो यह धारणा और भी मजबूत हो जाती है।सात फेरे लेने की जरूरत नहीं पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 7(1) पक्षकारों को विवाह के लिए विशेष समारोह की अनिवार्यता से मुक्त करता है। इसके...
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