प्रयागराज, जनवरी 15 -- प्रयागराज, विधि संवाददाता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि विवेचना और रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों से प्रथम दृष्टया हत्या का आरोप साबित होते हैं तो ट्रायल कोर्ट को आरोप तय करने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि एकत्र साक्ष्यों के अवलोकन से प्रथम दृष्टया यह संकेत मिलता है कि अपहृत व्यक्ति की हत्या कर उसके शव को ठिकाने लगाया गया है। ऐसे में ट्रायल कोर्ट की ओर से अपहरण के साथ-साथ हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोप तय करना पूरी तरह वैध है। न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद ने मंगल केशरवानी उर्फ पंकज कुमार केशरवानी एवं तीन अन्य की पुनरीक्षण याचिका खारिज़ करते हुए यह टिप्पणी की। प्रयागराज के थरवई थाने में याची के खिलाफ हत्या, अपहरण व साक्ष्य मिटाने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने इस मामले में आरोप पत्र कोर्ट में प्रस्तुत किय...
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