शाहजहांपुर, नवम्बर 24 -- ददरौल। साइबेरिया और रूस की बर्फीली जमीनों से हर साल हजारों किलोमीटर की थकान भरी उड़ान भरकर भारत पहुंचने वाले प्रवासी पक्षियों को अगर कोई 'नादान' कह दे, तो यह उनकी काबिलियत का अपमान होगा। ये नादान नहीं, बल्कि प्रकृति के सबसे हुनरमंद यात्री हैं। ना रास्ता भूलते हैं, ना मंज़िल। मौसम अनुकूल होते ही ये अपने बच्चों और परिवार के साथ उसी स्थान पर लौट आते हैं, जहां पिछले वर्षों में अपना प्रवास बिताया था। वन विभाग के उप प्रभागीय निदेशक डॉ. सुशील कुमार बताते हैं कि ये पक्षी हर साल अक्टूबर से मार्च के बीच भारत का रुख करते हैं। रूस और साइबेरिया में इस दौरान कड़ाके की ठंड पड़ती है, जिससे इनके अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगता है। वहीं भारत की जलवायु इनके लिए बिल्कुल अनुकूल रहती है। अभी न ज्यादा ठंड, न ही भोजन की कमी। यही कारण है कि...
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