शाहजहांपुर, नवम्बर 10 -- टैग:: रामबहोरन हत्याकांड मीरानपुर कटरा, संवाददाता। छकड़ापुर गांव की वह नींव आज भी जस की तस है। वही नींव, जिसे भरने की जिद ने एक पिता की जान ले ली। तीन बेटों के जीवन को जेल की सलाखों में कैद कर दिया। मामूली सी मेड़ और मिट्टी का विवाद ऐसा तूफान बन गया कि दो पीढ़ियां उजड़ गईं। अदालत ने भले ही फैसला सुना दिया हो, लेकिन परिवार आज भी उस दिन की चीखें भूल नहीं पाया है। राम बहोरन और उनके भतीजे ओमेंद्र, देवेन्द्र और धर्मेंद्र का खेत साथ-साथ था। खेत की मेड़ ही उनके रिश्ते की सरहद बन गई थी। 22 नवंबर 2022 की दोपहर जब राम बहोरन ने अपने हिस्से में मकान की नींव भरी, तो विवाद की शुरुआत हुई। नींव के लिए जो मिट्टी उन्होंने उठाई, वह भतीजों के हिस्से की थी। बात बस इतनी-सी थी, पर अहंकार और गुस्से ने रिश्ते की सारी मर्यादा तोड़ दी। कुछ ...