भागलपुर, नवम्बर 2 -- सहरसा। रविववार को गायत्री शक्तिपीठ में व्यक्तित्व परिष्कार सत्र को संबोधित करते हुए डाक्टर अरुण कुमार जायसवाल ने तुलसी पर्व एवं त्योहार और उत्सव के महत्व को बताते हुए कहा- सनातन संस्कृति में जो स्थान गी, गंगा गीता गायत्री का है, उतना ही महत्वपूर्ण स्थान तुलसी को प्राप्त है। 'तुलसी यह नामस्रमण ही हर हृदय को पवित्रता से परिपूर्ण कर देता है। पवित्र कार्तिक मास की देवोत्थान एकादशी को शुभ तुलसी विवाह का पर्व अत्यंत श्रद्धापूर्वक सोल्लास मनाया जाता है। तुलसी के अनेक गुणों का प्रकाश उसके अनेक पर्यायवाची नामों से ही हो जाता है। तुलसी के पत्ते चबाने से मुँह में लार जो कि अत्यन्त पाचक, अग्निवर्धक, भूख बढ़ाने वाला तत्व है बढ़ता है इसलिये उसे 'सीरसा कहा है। दूषित वायु, रोग और बीमारी के कीटाणु 'वायरस रूपी भूत, राक्षस और दैत्यों को...
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