गुमला, नवम्बर 19 -- गुमला, संवाददाता। बेहतर स्वास्थ्य सुविधा और गरीब मरीजों को सस्ती दवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खोला गया गुमला सदर अस्पताल का जन औषधि केंद्र आखिरकार बंद हो गया। करीब एक वर्ष की दौड़-भाग और तैयारी के बाद तीन महीने पहले शुरू हुए इस केंद्र को बंद होने में सिर्फ कुछ ही सप्ताह लगे। बंद दरवाजे के पीछे कई मानवीय समस्याएं छिपी हैं। कभी स्टॉक न मिलना,डॉक्टरों का सहयोग न मिलना और संचालक की आर्थिक विवशता। जन औषधि केंद्र का सपना था कि मरीजों को बाजार से 50 से 80 प्रतिशत कम कीमत पर दवाएं मिलें। यह वही योजना है जिसकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार वकालत करते रहे हैं, लेकिन गुमला में यह सपना धरातल पर उतर ही नहीं सका। शुरुआत से ही दवाओं का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध नहीं हुआ। मरीज आते तो थे,लेकिन कई बार उन्हें दवा न मिलने के कारण खाली ह...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.