प्रयागराज, जनवरी 28 -- प्रयागराज, वरिष्ठ संवाददाता। 'बंधुओं, आज शब्द साथ नहीं दे रहे हैं और स्वर बोझिल हैं। प्रयाग की इस पवित्र धरती पर हम आध्यात्मिक शांति की कामना लेकर आते हैं, लेकिन आज यहां से एक ऐसी रिक्तता और भारी मन लेकर लौटना पड़ रहा है जिसकी कल्पना हमने कभी नहीं की थी।' शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कुछ इन्हीं शब्दों के साथ बुधवार को माघ मेला क्षेत्र छोड़ दिया। माघ मेला में मौनी अमावस्या दिन पहिया लगी पालकी के साथ संगम स्नान के लिए जाते वक्त रोकने से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती प्रशासन से नाराज थे। इस दौरान पुलिस पर बटुकों व अन्य संतों से मारपीट का आरोप लगाकर उन्होंने तब तक स्नान न करने की बात कही थी, जब तक प्रशासन माफी न मांगे और ससम्मान उन्हें खुद ले जाकर स्नान न कराए। इसके बाद विगत 11 दिनों से शंकराचार्...