गाजियाबाद, अक्टूबर 24 -- भाईदूज का त्योहार भाई- बहन के प्रेम का प्रतीक है। कई बहनें ऐसी हैं, जिन्होंने अपना जीवन भाइयों के लिए समर्पित कर दिया। किसी ने भाइयों को पढ़ाने में कड़ी मेहनत की, तो किसी ने भाई का सपना पूरा करने को खुद पढ़ाई छोड़ी और किसी ने खुद की परवाह किए बिना भाई को नई जिंदगी दी।भाई क्रिकेटर बने, इसलिए त्रिवेदिका ने पढ़ाई छोड़ी भाई-बहन का बंधन दुनिया के सभी बंधनों से अनोखा बंधन होता है। कुछ ऐसी ही कहानी है स्वस्तिक चिकारा और उनकी बहन त्रिवेदिका की। स्वस्तिक दो बार से आईपीएल में चयनित हो रहे हैं। पहली बार वह दिल्ली की टीम में थे और दूसरी बार बंगलुरू की टीम में। उनकी सफलता का श्रेय उनकी बहन त्रिवेदिका को जाता है। त्रिवेदिका ने भाई को क्रिकेटर बनाने के लिए अपनी पढ़ाई तक छोड़ दी। स्वस्तिक के खाने पीने से लेकर उन्हें बॉल डालकर अभ्...
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