वाराणसी, जनवरी 25 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। इस वर्ष 'वार' की कृपा से भक्तों को सरस्वती पूजन तीन से चार दिन मनाने का अवसर मिला है। शनिवार और रविवार को विदाई नहीं करने की लोकपरंपरा में आस्था स्पष्ट दिखी। शहर इक्का-दुक्का छोड़ शेष सभी पूजा पंडालों में भगवती सरस्वती की प्रतिमा विराजमान रही। सुबह से रात तक धार्मिक-सांस्कृतिक अनुष्ठानों का दौर चलता रहा। शहर के अधिकतर सरस्वती पूजा पंडालों में भंडारा करने की नई परिपाटी दूसरे दिन भी पूरे रंग में दिखी। औसतन हर चौथे पूजा पंडाल के बाहर लोग लंबी-लंबी कतारों में खड़े होकर प्रसाद पाने के लिए अपनी बारी की प्रतीक्षा करते दिखे। देवी वीणावादिनी को प्रसन्न करने के लिए हवन आदि किए गए। लोकगीत, सुगम संगीत, नृत्य की प्रस्तुतियों का दौर शाम होते पूजा पंडालों में शुरू हो गया था। कहीं आयोजक संस्था के सदस्यों के ...
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