रांची, फरवरी 21 -- नामकुम, प्रतिनिधि। सरला बिरला विश्वविद्यालय में चरित्र निर्माण एवं व्यक्तित्व के समग्र विकास पर आधारित दो दिनी कार्यशाला संपन्न हो गई। इस दौरान नई दिल्ली से आए डॉ चांद किरण सलूजा ने आनंदमय कोश पर व्याख्यान देते हुए कहा कि अपनी शक्ति और ऊर्जा को पहचानना ही आनंद है। उन्होंने कहा कि जब जीवन अनुशासित होता है तब वह संगीत की तरह सुखद बन जाता है, अन्यथा वह केवल शोर बनकर रह जाता है। डॉ सलूजा ने शिक्षा नीति पर चर्चा करते हुए कहा कि शिक्षक वही है, जिसके आचरण को विद्यार्थी अपना गुण बना लें। बिहार यूनिवर्सिटी के संयुक्त निदेशक डॉ राजेश्वर पराशर ने पंचकोश का महत्व बताया। कार्यशाला के प्रेजेंटेशन सत्र में विभिन्न समूहों ने अपने निष्कर्ष प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के अंत में डीन डॉ नीलिमा पाठक ने सभी सत्रों का सार रखा और धन्यवाद ज्ञापन ड...