नई दिल्ली, दिसम्बर 2 -- सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि लोक अभियोजक (सरकारी वकील) अदालत का एक अधिकारी होता है, जिसका कर्तव्य न्याय के हित में काम करना है, न कि सिर्फ आरोपी को सजा दिलाना। शीर्ष अदालत ने साफ किया कि सरकारी वकील आरोपी को सजा दिलाने के मकसद से न्याय हित में अदालत के प्रति अपने कर्तव्य से मुंह नहीं मोड़ सकता है। जस्टिस संजय करोल और एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने हत्या के मामले में 3 आरोपियों को दोषी ठहराकर दी गई सजा रद्द करते हुए यह फैसला दिया। पीठ ने लोक अभियोजक के बर्ताव पर भी चिंता जताई और कहा कि उनसे उम्मीद की जाती है कि वे आजादी से काम करें, न कि हर बार सिर्फ बचाव पक्ष के वकील की तरह काम करें। शीर्ष अदालत ने पटना हाईकोर्ट के सितंबर, 2024 के फैसले को चुनौती देने वाली अपील का निपटारा करते हुए यह फैसला दिया। आरोपिय...