गिरडीह, जनवरी 11 -- पीरटांड़। जैन धर्म के चौबीस में से बीस तीर्थंकरों की निर्वाणभूमि सम्मेदशिखर पारसनाथ की धरती मधुबन का तेजी से विस्तार हो रहा है। मंदिर व धर्मशालाओं की नगरी मधुबन में लगातार अत्याधुनिक होटल व गगनचुंबी जिनालय निर्माण का सिलसिला अनवरत चल रहा है। अत्याधुनिक व सुसज्जित धर्मशाला आकर्षण का केंद्र बन रहा है। उल्लेखनीय है कि पुराने जमाने में सम्मेदशिखर की यात्रा पर आनेवाले श्रद्धालुओं को कुछ खास व्यवस्था नहीं मिल पाती थी। धर्मशाला के नाम पर मधुबन में सड़क किनारे महज तीन कोठियां उपलब्ध थी। पर्वत की यात्रा पर आनेवाले तीर्थयत्रियों को तीन कोठियों में ही आश्रय मिलता था। सड़क किनारे स्थित पहली कोठी यानी तेरहपंथी कोठी, बिचली कोठी यानी जैन श्वेताम्बर सोसाइटी तथा उपरैली कोठी के रूप में बीसपंथी कोठी में तीर्थयात्रियों के लिए नि:शुल्क भोजन व...