हरिद्वार, नवम्बर 15 -- गुरुकुल कांगड़ी विवि के दर्शनशास्त्र विभाग द्वारा आर्ष क्रान्ति के पुनरुद्धारक महर्षि दयानन्द सरस्वती विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान में मुख्य वक्ता प्रो. सोहनपाल आर्य ने महर्षि दयानन्द के वैचारिक योगदान, सामाजिक सुधार, वेद-प्रचार तथा आर्य समाज की मूल चेतना के पुनरुद्धार में उनके अद्वितीय प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानन्द की वैचारिक क्रान्ति का आधार सत्य, तर्क, नैतिकता और वेद प्रणीत जीवनदर्शन था, जो आज भी भारतीय समाज और शिक्षा-जगत के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने बताया कि किस प्रकार महर्षि दयानंद ने अपने गुरु स्वामी विरजानंद से प्रेरणा लेते हुए वेद एवं शास्त्रों की वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक व्याख्या प्रस्तुत की एवं इस प्रकार आर्ष क्रांति के पुनरुद्धार का भगीरथ कार्य सम्पन्न किया।

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