चंदौली, दिसम्बर 19 -- चहनियां, हिन्दुस्तान संवाद। क्षेत्र के पक्खोपुर देवनाथपुरी ज्ञान यज्ञ महोत्सव के अंतिम दिन गुरुवार को संत लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी ने कहा कि सुबह बिना स्नान किये प्रभु का ध्यान नहीं करना चाहिए। यदि जहां राष्ट्र और समाज का कल्याण होता है तो वहां झुक जाना ही बेहतर होगा। कहा सर्पों से शर्त हारने के बाद गरुण देव की माता को दासी बनना पड़ा। गरुण देव को भी दासी पुत्र का उपाधि देने लगे। सर्पो ने शर्त रखा कि यदि इंद्र लोक से मेरे लिए अमृत कलश लेकर आओगे तो मैं दास से मुक्त कर दूंगा। एक बार गरुण और इंद्र की सेना में अमृत के लिए भीषण युद्ध हुआ। गरुण ने इंद्र की सेना को पस्त कर अमृत कलश ले गये। इंद्र ने रास्ते मे रोकने का प्रयास किया तो गरुण ने कहा कि मैंने सर्पराज को बचन दिये है। सर्पो से कहा कि पहले मेरी माता को दास मुक्त करो...