लखनऊ, दिसम्बर 7 -- भारत विकास परिषद, अवध प्रांत की ओर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में कृष्णानगर स्थित सुमतिनाथ सेवा भवन में आयोजित पांच दिवसीय पंचसूत्रीय कथा महोत्सव का तीसरा दिन समरसता के नाम रहा। समरसता को समर्पित विशेष यज्ञ हुआ और समाज में समरसता की भावना को बढ़ाने के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वालों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर आचार्य संजीवकृष्ण ठाकुर ने समरसता को किसी सिद्धांत की तरह नहीं, बल्कि व्यवहार और संस्कार की तरह समझाया। उन्होंने कहा कि समाज तभी संतुलित बनता है जब हर व्यक्ति दूसरे की गरिमा को स्वीकार करे और उसे बराबरी का स्थान दे। उन्होंने कहा कि मन की दूरी कम करना ही असली समरसता है। मुख्य वक्ता आरएसएस के सह-क्षेत्र प्रचार प्रमुख (पूर्वी उत्तर प्रदेश) मनोज कांत ने कहा कि समरसता का अर्थ केवल दूरी म...