गढ़वा, अक्टूबर 9 -- गढ़वा, प्रतिनिधि। कारगिल युद्ध में शामिल तिवारी मरहटिया गांव निवासी गौरीशंकर तिवारी ने बताया कि युद्ध के कारण वह लंबे समय तक परिवार से दूर थे। उस दौरान पत्राचार से समाचार का आदान प्रदान होता था। युद्ध खत्म होने के बाद तत्कालीन कमांडिंग ऑफिसर ने अपने अपने परिवारों को पत्र लिखने की छूट दी थी। उसके बाद फौजी अंतरदेशी में अपने घर और परिवार के लोगों को पत्र लिखकर अपने कुशलक्षेम की जानकारी दी थी। पत्र आने में करीब 15-20 दिन लग जाते थे। अब समय बदल गया है। बदले समय में लोग तुरंत मोबाइल से बात करते हैं। वीडियो कॉल से बात होती है। तकनीकी विकास के साथ ऐसा प्रतीत होता है कि दुनिया अपने हाथ में है। बस एक कॉल करें और बात हो जाएगी। समाचार के आदान प्रदान के लिए अब 15-20 दिनों का इंतजार नहीं करना पड़ता है। डाक सेवा भी कंप्यूटरीकृत होने स...
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